एक सामान्य दिन में बिना जिम जाए खुद को स्वस्थ रखने का तरीका।
एक व्यस्त ज़िंदगी में जिम का रास्ता पकड़ना हर कोई नहीं पा पाता। काम के दबाव, घर की फिक्र, और बढ़ते कामों के बीच समय निकालना मुश्किल पड़ जाता है। इसी बीच अपने घर में व्यायाम करना कई बार बेहतर रास्ता बन जाता है। घर पर वर्कआउट समय भी बचाता है, पैसे भी बचाता है, और आपको जिस समय मन करे शुरू करने की छूट देता है। इसी लेख में आप देखेंगे कि घर पर व्यायाम कैसे किया जा सकता है ताकि फायदा भी मिले और झंझट भी न हो।
1. घर पर वर्कआउट करने के फायदे
कई फायदे होते हैं, जब कोई अपने घर में वर्कआउट करता है।
घर पर व्यायाम करने से जिम तक का सफर छूट जाता है।
घर पर कसरत करने से जिम में पैसा खर्च करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। साथ ही, वहाँ तक जाने का समय और डीजल भी बच जाता है।
जब आराम महसूस करो, तब व्यायाम करना शुरू कर दो - सुबह हो, दोपहर हो या फिर शाम।
घर पर कसरत करना इसलिए आसान है क्योंकि तुम्हारी जगह खुद की होती है।
2. घर पर वर्कआउट शुरू करने से पहले तैयारी
एक अच्छी मूवमेंट के लिए सबसे पहले शरीर को तैयार करना ज़रूरी है।
एक ऐसी जगह चुन लेना जहाँ तुम्हें खिंचने और हिलने-डुलने के लिए जगह मिले।
जब भी चलें, आराम से बैठने वाले कपड़े उतरें - ऐसे जो शरीर के साथ झगड़ें नहीं। अच्छे जूते तभी मदद करते हैं जब वे पैर के आकार से मिल जाएँ, न कि घसीटे जाएँ।
हफ्ते के पहले दिन सैर करने से भी फायदा होता है। थोड़े दिन बाद सीढ़ियाँ चढ़ना शुरू कर दें। इसके बाद जब तनाव कम लगे, तभी कुछ अधिक मेहनत वाले काम डालें। शुरुआत में जो सरल लगे, उसी से आगे बढ़ें। अगले हफ्ते कुछ और गति डाल दें।
थोड़ी गति से चलना शुरू करने पर तापमान धीरे-धीरे बढ़ता है। पानी की बोतल जेब में होनी चाहिए, हमेशा नजदीक।
3. घर पर किए जाने वाले बेसिक वर्कआउट्स
बिना किसी मशीन के भी घर पर कई तरह की आसान व्यायाम संभव हैं।
a) कार्डियो एक्सरसाइज
एक पैर से दो पैर पर कूदते हुए, जम्पिंग जैक तेजी से धड़कन शुरू कर देता है। इसके बाद शरीर ऊर्जा खर्च करने लगता है।
दौड़ना या जॉग करना – बस अपनी जगह पर खड़े होकर कदम बढ़ाएँ।
b) स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
ऊपर से नीचे की ओर धकेलने वाली मुद्रा में, पुश-अप्स छाती के साथ-साथ भुजाओं के पिछले हिस्से को भी सक्रिय करते हैं।
कमर से नीचे की ताकत बढ़ाने में स्क्वॉट्स काम आते हैं।
ऊपर से नीचे तनाव महसूस होता है प्लैंक के दौरान। कड़ी मेहनत से पेट की मांसपेशियों में जान आती है। धीमी गति से शरीर संभलता है।
c) फ्लेक्सिबिलिटी और स्ट्रेचिंग
हड्डियों के आसपास की मांसपेशियाँ योग से ढीली पड़ती हैं, फिर चोट लगने का डर कम हो जाता है।
हर दिन कैट-काउ स्ट्रेच की शुरुआत करना चाहिए। इसके बाद ट्राइसेप्स पर ध्यान जाता है, वहाँ थोड़ी खींच के साथ समय बिताना अच्छा रहता है। फिर लेग स्ट्रेच में आगे बढ़ जाना जरूरी है, पैरों को ढीला छोड़ने से तनाव घटता है।
हलके डंबल के साथ एक्सरसाइज, अगर मौका मिले।
एक छोटी-सी चीज़, मगर काम की। पानी से भरी बोतल या फिर घर का कोई डम्बल। जब जरूरत हो, तब इस्तेमाल हो जाए।
हल्के बाइसेप कर्ल से शुरू करना चाहिए। उसके बाद कंधों पर ध्यान देते हुए प्रेस करें। मजबूती से डेडलिफ्ट का अभ्यास करना भी जरूरी है।
4. वर्कआउट रूटीन बनाना
हर बार एक जैसा तरीका अपनाने से घर पर व्यायाम में आसानी होती है।
हल्की हलचल से शुरू करें - पाँच से दस मिनट का तैयारी समय।
हल्की दौड़ के बाद मसल्स पर ध्यान। फिर तनाव कम करने वाली हरकतें। ऊर्जा बढ़ाने के लिए पैदा हुई गति।
ठंडा होने का समय। लचीलापन बढ़ाएं, सांस धीमी रखें - इतना ही। पाँच से दस मिनट ऐसे गुजारें।
हफ्ते में चार या पाँच दिन इसे करना ठीक रहता है। शुरुआत में बीस से तीस मिनट तक टाइम लगाना काफी होता है। आदत जमने लगे तब थोड़ा ज्यादा समय निकालें। कष्ट भी धीरे-धीरे ऊपर उठाएं।
5. घर पर वर्कआउट करते समय ध्यान देने योग्य बातें
गलत तरीके से मुड़ने पर चोट लग सकती है, इसलिए ध्यान से कदम बढ़ाएं।
दर्द महसूस हो? फिज़िकल एक्टिविटी बंद कर देना।
पानी पीते रहो क्योंकि शरीर को हमेशा तरोताज़ा रखना चाहिए। अच्छे खान-पान पर ध्यान देना भूलना मत, वो बस इतना ही ज़रूरी है।
हौसला बरकरार रखने के लिए संगीत काम आए, कभी-कभी ऑनलाइन फुटेज भी हथिया ले। दूसरी तरफ अपने साथ कोई और घमंड उठाता रहे तो वर्कआउट धीमा नहीं पड़ता।
6. घर पर वर्कआउट के फायदे लंबे समय में
इसकी मदद से वजन पर काबू पाना आसान हो जाता है।
शरीर में टोनिंग आए, इसके साथ मांसपेशियाँ मजबूत हो जाती हैं।
शांत मन लेकर चलो, फिर तनाव धुंधला पड़ जाता है। अच्छी नींद के कदम देर से आए, पर आकर ठहर जाते हैं। खुद को समझने लगो, तो मानसिक हल्कापन घर बना लेता है।
थोड़ा समय बाद शरीर के अंदरुनी कामकाज में सुधार नजर आने लगता है। एक तरह की चुस्ती पैदा हो जाती है जो पहले महसूस नहीं होती थी।
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